प्रदेश को 13 काॅलेजों में प्राचार्य नियुक्ति होने से छात्रों का भविष्य पहले से अच्छा होगा।

प्रदेश को 13 काॅलेजों में प्राचार्य नियुक्ति होने से छात्रों का भविष्य पहले से अच्छा होगा।

देहरादून। उत्तराखंड के 13 बदहाल काॅलेजों के अब दिन बदलने वाले हैं क्योंकि उत्तराखण्ड के अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा डाॅ रणबीर सिंह ने इन 13 काॅलेजों में प्राचार्य नियुक्ति के आदेश जारी कर दिये हैं। राज्य के 13 सरकारी विश्वविद्यालयों का प्राचार्य का सपना खत्म हो गया है। अब इस विश्वविद्यालयों में डीपीसी से पदोन्नत हुए प्रार्चायों को नियुक्ति के आदेश शुक्रवार को अपर मुख्य सचिव उच्च शिक्षा डाॅ रणबीर सिंह को जारी कर दिये है। राज्य में छात्र-छात्राओं के आंदोलनों को खत्म करते हुये व्यूणी में प्राचार्य की नियुक्ति कर दी है। वहां पर छात्र-छात्राओं और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रीतम सिंह को दिये गये वायदे को सरकार ने पूरा किया।

शासन की ओर से शुक्रवार को जारी आदेशों में पदोन्नत प्राचार्यों डॉ पुष्पेंद्र पांडे को दुर्गनापुरी, डॉ आनंद सिंह को देवीधुरा, डॉ नवनीन रानी राजवंशी को थलीसैंण, डॉ अल्पना जोशी को बेदीखाल, डॉ रेनू रानी को उफरैंखाल, डॉ बच्ची राम पंत को चौबट्टाखाल, डॉ नरेंद्र सिंह बनकोटी को तिलवाड़ी, डॉ अरविंद किशोर तिवारी को बड़कोट, डॉ कैलाशचंद्र दुधपुड़ी को मजरा महादेव, डॉ विजय कुमार अग्रवाल को पोखड़ा, डॉ अंजना श्रीवास्तव को त्यूणी, डॉ केएन बरमोला को घाट और डॉ प्रताप सिंह जग्वाण को गुप्तकाशी में तैनाती दी गई है।

दरअसल, सरकार प्राचार्य पदों पर पदोन्नति होने के बाद नई तैनाती पर जाने से कन्नी काटने वालों को भविष्य में पदोन्नति का मौका नहीं देने का निर्णय ले चुकी है। इससे पहले बीती छह सितंबर को डीपीसी में पदोन्नत प्राचार्य के 16 पदों पर तैनाती के आदेश जारी हुए थे। इनमें काफी संख्या में नवनियुक्त प्राचार्यों ने कार्यभार ग्रहण नहीं किया था। 13 सरकारी डिग्री कॉलेजों को स्थायी प्राचार्य मिलने में शंका रहने की गुंजाइश न के बराबर मानी जा रही है।