जब गरीब छात्रों के लिए गुरुजी ने जीपीएफ से सात लाख रुपये निकाले। आज गांधी ने हुकम सिंह उनाल को गले लगा दिया।

जब गरीब छात्रों के लिए गुरुजी ने जीपीएफ से सात लाख रुपये निकाले। आज गांधी ने हुकम सिंह उनाल को गले लगा दिया।


श्री राजमोहन गांधी अपनी पत्नी के साथ दो दिवसीय देहरादून यात्रा पर थे। कल उनका वयाख्यान था।आज उन्होंने एक ऐसे विद्यालय में घण्टों समय बिताया,जहाँ वे गरीब बच्चें पढ़ते हैं जिनका कोई सहारा नहीं है।


हुकम सिंह उनाल, एक सरकारी प्राइमरी टीचर थे। राजपुर रोड प्राथमिक विद्यालय में। जो आज पूर्व माद्यमिक विद्यालय है। आज वे प्रिंसिपल हैं। देहरादून के एक परिवार ने स्कूल चलाने के लिए जगह दी थीं। तब उत्तर प्रदेश था। देहरादून में अंग्रेजी स्कूलों का बोल बाला था। इसलिए इस पर ध्यान नहीं गया। राज्य बना यहां जमीन का कारोबार ने बड़ा रूप ले लिया। इस तरह की जमीनों पर गिद्द नज़र पड़ने लगी। स्कूल की जमीन का मालिक का नाती दिल्ली रहता था। उसे लाया गया। स्कूल हटाने का प्लान तैयार किया गया। ताकी …. मालिक की तरफ से केस किया गया। हुकुम सिंह ,केस लड़ने वयक्तिगत जाते थे।

श्री नंदनंदन पांडेय,जी जो निदेशक थे। ने पर्दे के पीछे हुकुम सिंह। जी का साथ दिया। ऐसा साथ की बाज़ी पलट गई। एक तरफ गरीब बच्चे, दूसरी तरफ बेस कीमती जमीन की दौलत। बिल्डर पीछे हट गए। पांडेय जी, बड़े नेताओं के सामने, हाँ करते थे। और पर्दे के पीछे हुकुम सिंह का साथ देते थे। इस घटना से कमला पंत के प्रति मेरी इज्जत बढ़ गई।
कभी कभी चुप चाप बड़े काम हो जाते हैं। जो बाद में फल देते गिने जाते हैं। जमीन चले जाती, तो क्या होता, राजपुर रोड़ में एक शॉपिंग कॉप्लेक्स और बन जाता। लेकिन क्या वहां राजमोहन गांधी आते? नहीं नहीं। हुकुम सिंह जी के नेतृत्व में स्कूल है सब आएंगे। अच्छी चीज है। बनाई हुई। सींची हुई।

एक दौरान चार, बच्चे होते थे। और टीचर पांच। हुकुम सिंह उनमे एक थे। कोई टीचर एलआई सी एजिंट था। तो कोई एमवे का।
किसी को क्या पड़ी थी विद्यालय रहे या जाए। गरीब बच्चों को हुकम सिंह ने बस्तियों से विद्यालय लाया। गरीब बस्तियों में माहौल बना। अखबार में एड निकाला गया। तब जाकर संख्या 25 बच्चे की हुई। वे रात में वहीँ रहते थे। बारिश में जब छत की टिन सड़ गई ,तब हुकुम सिंह ने अपने जीपीएफ के सात लाख रुपये निकाले और तब विधालय की टीन शेड बदली गई। फर्स पक्का किया गया।
वे गरीब छात्रों के लिए समर्पित हो गए। निदेशक पांडेय जी का सपोर्ट मिलता रहा।छात्रों की सेवा के लिए,। जब गुरुजी रात रात घर नहीं आते थे। तब परिवार को चिंता होने लगी। उन्होंने परिवार को स्कूल के एक कमरे में शिफ्ट कर दिया। पत्नी रोटी बनाने लगी, छात्रों के लिए। फिर प्रचार मिलने पर भीड़ बढ़ती गई।

गुरुजी हुकुम सिंह को पता चला कि विकासनगर में गेंहू सस्ता मिलता है। वहीं से स्कूटर में बोरी उठा दी। उनके बच्चों ने उन गरीब छात्रों को अपना भाई बहन माना। गुरुजी में एक जुनून सवार हो गया था। इस बीच देहरादून के डीएम पुरुषोत्तम भी गुरुजी की विद्यालय से प्रभावित हुए। 15 दिन में एक बार जाने लगे। छात्रों के बीच बैठने लगे। भोजन देने लगे। वे फल भी लाते थे।

100 गरीब छात्रों को रहने की लिमिट है लेकिन रहते हैं वहाँ 200 के करीब। सरकार से 100 बच्चों का राशन मिलता है। 100 बच्चों का लोग दान दे देते हैं। और अब गुरुजी के संबंध भी हो गए हैं।
देहरादून के एसपी सिटी श्री प्रदीप राय से दो माह पहले पहली और आखरी मुलाक़ात हुई थीं। कहे कि गुसाईं जी मैं अपना जन्मदिन, बच्चों का , उनियाल जी के स्कूल में मनाता हूँ। बड़ा सुकून मिलता है। बकौल राय अपने दोस्तों एडीएम,एसडीएम को वहीं जाने को कहता हूँ। वे कहते हैं वास्तव में शहर के निर्धन बच्चों के पढ़ने का मंदिर है वहा। कुछ अफसर अब वहीं जन्मदिन मनाते हैं। यह बात उन्होंने सीओ जया बलूनी के सामने कही थी।

अब यहाँ इंटर मीडिएट की छात्र भी रहते हैं। नेताओ की सिफारिस आती है कि उस गरीब बच्चें को रख दो।गुरुजी का परिवार अब बद्रीश कालोनी रहता है। काफी साल उनकी पत्नी ने छात्रों के रोटी, खाना बनाया।उपकार और सेवा भाव,ईमानदारी दूर तक असर करता है देखए, उनकी लड़की ने एसजेए देहरादून से इंटर किया, तो दिल्ही ग्रेजुएट करने चली गई। तैयारी करनी लगी। इस बीच लड़की की शादी महारास्ट्र मूल के आईएएस से हो गई। दामाद हिमाचल के विलासपुर में डीएम थे। वे नड्डा के पसंदीदा अफसरों में थे। अब चीफ मिनिस्टर जयराम अपने गृह जिले मंडी डीएम ले गए हैं। एक बेटा है वो ज्यूडिशियल की तैयारी कर रहा है। एक और बेटी कर्नाटक में एसबीआई में पीओ है। कहते हैं ईमानदारी का फल बच्चों पर भी मिलता है। यह यहीं दिखता भी है। दिखाई भी देता है।

पिछले साल गुरुजी हुकुम सिंह जी को राष्ट्रपति पुरुस्कार मिला। वे हकदार भी थे। लेकिन हकदार इस जमाने पीछे रह जाते हैं।बताते हैं ईमानदार प्रमुख सचिव राधा रतूड़ी को अभी तक गुरुजी को पुरस्कार न मिलने की जानकारी हुई। तो उन्होंने न्याय देने के लिए, एजुकेशनल अफसरों को अपनी मनसा जाहिर की थीं। फिर टीचर का सर्वोच्च सम्मान हासिल हुआ। लोगों में खुशी देहरादून से लेकर गांव अंजनीसैन पट्टी खास( टिहरी )तक थीं। गांव में गुरुजी का विद्यायक श्री धन सिंह नेगी ने फूल मालाओं से स्वागत किया। लोग ढोल दमाऊ लेकर अंजनीसैन आये थे। इलाके के लिए यह गौरवशाली छण था।

आदर्श गुरुजी हुकम सिंह उनाल को सलाम। उन्होंने अपना जीवन गरीब बच्चों के उत्थान की नींव पर लगा दिया। शीशपाल गुसाईं ,देहरादून द्वारा मूल रूप से लिखा गया है। कॉपी पेस्ट नहीं है।