उत्तराखंड ऐसे आएंगे उत्तराखंड में पर्यटक

उत्तराखंड ऐसे आएंगे उत्तराखंड में पर्यटक

1984 में जॉन विलार्ड मरिएट ने सबसे पहले वांसिगटन डीसी में होटल खोला। वहां लोगों को पसंद आने लगा। देखते ही देखते ही आज उस चेन के 84 होटल, रिजॉर्ट
दुनिया मे हो गए हैं। उनमें उत्तराखंड में मसूरी से 14 किलोमीटर आगे कैम्पटी में एक होटल,रिजॉर्ट है। होटल राज चोपड़ा का है। वे नई दिल्ली रहते हैं। लेकिन उनका काम देख रहे हैं निदेशक के रूप में श्री रमन सहगल। सहगल ने विस्तार से पहली बार विशेष इंटरव्यू में बताया पर्यटन के बारे में टूरिस्ट के बारे में। मुझे टिहरी की विशाल झील के बारे में दिलचस्पी थी। कि वहाँ पर्यटक क्यों नहीं आ रहे हैं?

सहगल साहब और बताइये?
क्या बताना , फुर्सत नहीं है।
आज आंध्र हैदराबाद की शादी है
देख रहे हैं आप
कल की निबट गई कुशल पूर्वक,
वो भी बड़ी शादी थीं।
150 इनोवा की डिमांड थीं।
मसूरी देहरादून, ऋषिकेश, हरिद्वार से अरेंज की गई।
उसमें मेहमान आये।
तीन हवाई जहाज आए थे।
जॉलीग्रांट। केवल इनोवा की डिमांड थीं। उसे ही
टूरिस्ट कम्फर्ट महसूस समझते हैं।
गुप्ता बंधु की शादी थीं ,नई दिल्ली के।
200 ट्रक सामान आया था। आज भी डेढ़ सौ ट्रक आये हैं।
टैंट, सामान, फूल, सजावट इतियादी के दो सौ ट्रक आज ही गए हैं। और आंध्र वालों के आ रहे हैं।
क्या मेला लगा था। उस दिन।
प्रधान जी की लड़की की बारात भी थीं।
लेकिन ट्रकों के आवागमन, जाम बता रहा था
होटल कितना चलता है।

इस बीच मैंने एक रूम देखने की अपील की थीं। सिर्फ देखना
मैंने सोने तो देहरादून आना था।
सहगल ने हाथ जोड़ दिया।
कहा बाहर नहीं निकाल सकता हूँ। किसी को।
मैंने चेहरे का भाव, लाल किया तो उन्होंने किसी को आदेश दिया। 40 सेकिंड में चाबी हाजिर।
फिर रूम देखा। और होटल की नई चीजें।
फिर सहगल जी ने कॉफी ऑफर की।
आंगन से किसी पत्रकार का फोन आ रहा था।
कि हीरो का इंटरव्यू दिला दो सर। वो कहे देखता हूँ।
फिर बड़बड़ाते हुए कहे,कहाँ डिस्टर्ब कंरू?
दो तीन दिन के लिए लोग शांती में आते हैं।
हम भी नागर्जुन के रूम से गुजरे। मुझे 2 दिन बाद आज अखबार
से पता चला। वो लोग गोपनीयता भी रखते हैं। रखनी भी चाहिये
अपने कस्टमर्स के।

नागर्जुन दरअसल शादी में आये थे। उस शादी में 200 मैरेज इवेंट वाले थे। वो लोग देख रहे थे कि कहाँ क्या है। क्या करना है।
मतलब सारी व्यवस्था।
एक रात में 1 करोड़ 20 लाख खर्चा( एक बारात)
अगली सुबह को हैदराबाद। नई दिल्ली, मुंबई।
फूल वाले, और डेकोरेशन भी दिल्ली से।
देहरादून में होते तो,अच्छा विजनिस होता।
दिल्ली में फूलों की वेराइटी, और अनुशासन,
जुबान, प्रोफ़ेसनालिज्म ज्यादा बताया जाता है।

सहगल कहते हैं गुसाईं जी
तब आया यहाँ कैम्पटी ।जब जॉलीग्रांट से
एक या दो फ्लाइट थीं। आज 12 से 16 है
मुम्बई, कोलकाता की डेरेक्ट्।
हमारा 90 % ग्राहक जॉलीग्रांट वाला है।
अब सड़के अच्छी है।

हमें उत्तराखंड को क्या फायदा?
साब गुसाईं जी आप इतने समझदार लगते हो
60 से 100 करोड़ का विजनेस कर रहे हैं हम साल भर में।
28 करोड़ उत्तराखंड को टैक्स में जा रहा है।
मैंने कहा गुड। और तो और लोकल लोगो को
300 लोगों को प्रत्यक्ष,अप्रत्यक्ष रूप से
रोजगार मिल रहा।
200 ट्रक के ड्राइवर, कंडक्टर, लेबर, लोकल
रहते हैं। खाना खाते हैं। बिक्री करते हैं।
वे आगे कहते हैं कैम्पटी में अब होटल
ही होटल हो गए हैं। छोटे बड़े। जब मैं आया था
6 बजे दुकाने बंद हो जाया करती थी।
अब 10, 11रात तक बजे बंद होती है।
रिजॉर्ट में 105 रूम है। 1 रूम में जो गेस्ट
होता है। या फैमली होती है
उनकी देखभाल के लिए
5 आदमी होते हैं। वो सब बाहर ही खाना
खाते हैं। बाहर घूमते हैं।
होटल के नीचे साड़ी, और ब्रास की
दुकाने खुल गई हैं।

आप 80 किलोमीटर दूर टिहरी झील में क्यों नहीं खोलते?
नीचे गंगा जल है सुध पानी है।
सहगल – गया था युगल किशोर पंत जी डीएम ने बुलाया था दो साल पहले।
हमनें कहा झील में ऊपर होटल ,बनेगा। खाना, पीना चलेगा
गांव वालों ने प्रस्ताव का विरोध किया।
झील के ऊपर पर्यटक बीयर भी पियेगा।
इंज्वाय करेगा। दुनिया में होड़ मची हुई है
कि हमारे यहाँ पर्यटक आये, हम रिझाए।
आज हिमाचल ने तरराकी कर ली है।
हमीरपुर में हमारा होटल निर्माणधीन है।
40 किलोमीटर की टिहरी झील में उनके ग्रुप ने 500 करोड़ रुपये
इन्वेस्ट की इच्छा जताई थी।इससे राजस्व ही मिलता।
उत्तराखंड को। लेकिन विरोध का कोई हल
नहीं।

जे डब्ल्यू मे्रेएट में इस लिए भी देश विदेश से पर्यटक
आते हैं , उसका नाम बहुत बड़ा है। चीन ,अमरिका,लंदन,जयपुर, मुम्बई में उसके होटल है। और अच्छी सुविधाएं है। सबसे बड़ी बात
लोग नाम पर भी मर रहे हैं। इंटरनेशनल ब्रांड में रहे हैं।
जब से भारत ने विकसित देशों को पहचाना, दुनिया गोल होने लगी। इंटरनेट महाशक्ति हो गया। तब से इस तरह की जगह में पर्यटकों की आमद बढ़ गई है। शैलानी छुटियों में पहले ऊटी, शिमला, दार्जलिंग जाता था। वही पर्यटक आज कैम्पटी आ रहा है।
समझदार पूंजीपती लोग 70 वर्ष की औसतन आयु समझ कर इस तरह की हरी भरी जिंदगी में खूब पैसा ख़र्च करते हैं।

उत्तराखंड सरकार को होटल इंडस्ट्री में निर्माण, के लिए सरल
प्रकिया अपनानी चाहिये। और होटल इंडस्ट्रीज को लोगों
के लिए रेड कार्पेट बिछाना चाहिए। ताकि टैक्स तो आये।
तनख्वाह तो मिलेगी। समय पर। टेंशन नहीं रहेगी।

डेढ़ साल पहले, मैं विधोली एक यूनिवर्सिटी को देखने गया था।
लौट रहा था। विधोली के रास्ते, शानदार स्कूक दिखा। मैंने अंदर गाड़ी से ही 10 मिंट तक स्कूक की सड़कों से स्कूल को देखा।
पूरा भी दिखाई नहीं दिया। विशाल स्वमिंग पुल दिखना, शेष रह गया था। शानदार था। बताया गया। यह मान साहब का है। कई एकड़ में फैला। बोडिंग है। मान साहब देहरादून के स्कूल इंडस्ट्री के बड़े नाम है। उनका का शहर में भी एक मशहूर डे एंड बोडिंग स्कूल है। एक दिन उनसे मिलना हुआ। मैंने कहा – आपने बहुत शानदार स्कूक बनाया है। वे कहे गए आप?
उनके चेहरे पर खुशी का भाव झलकने लगा।
फिर उन्होंने कहा साहब कैसे कैसे सचिवालय
से फतह हाशिल की , मेरी आत्मा ही जानती है।
डेड दो साल लग गए तमाम एनओसी को
सरल काम, गंभीर बन जा रहा था।
मेरा मानना है जब स्कूल का इंफ्रास्ट्रक्चर बन गया
तब वे दो साल क्यों घुमाए गए, जहाँ 10 हज़ार बच्चों
ने आना था। हमारा राज्य का दो साल का टैक्स, जीएसटी
मारा गया न ? यदि रोका जाता, तो तभी रोका जाता
जब बुनियाद पड़ रही थी। जब 200 करोड़ लग गए
तब, दिक्कतें क्यों पैदा की जाती है?

तो जे डब्ल्यू मेरीएट, जैसे होटल तमाम टूरिस्ट स्पॉट पर हों।
तभी हमारा टूरिज्म का सपना साकार होगा।
उनके आगमन के लिए, सचिवालय के सामने हमारे भाई साहब और मित्र डॉ अश्विनी डोभाल जी के क्लीनिक से तमाम अनुभागो तक रेड कार्पेट बिछे।

शीशपाल गुसाईं की सहगल जी के साथ बातचीत पर आधारित।